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8 December 2016

Nick Vujicis मोटिवेशनल लाइफ स्टोरी इन हिंदी / दुनिया का सबसे बड़ा मोटिवेशनल इंसान Nick Vujicis

Nick Vujicis  मोटिवेशनल लाइफ स्टोरी इन हिंदी / दुनिया का सबसे बड़ा मोटिवेशनल इंसान Nick  Vujicis   जरूर पढ़े। 

Nick Vujicis Motiviational life story in Hindi
Nick Vujicis


दोस्तों आज हम ऐसे Motivational Man  Nick  से मिलने वाले है जिसको देखते और सुनते ही हम यह बोलने को मजबूर हो जायेगे की सच में असंभव कुछ भी नहीं , Nick Vujicic एक ऐसा आदमी है जिसे हाथ और पैर नहीं है।  एक ऐसे विकलांग व्यक्ति को दया और मदत और मोटिवेशन की जरुरत होती है।  पर ऐसा यहाँ नहीं है Nick जिंदगी को challenge करते है।  और वो खुद लाखो लोगो को Motivate और प्रेरणा देते है।  Really Hats Off Such a Real Man. दोस्तों I Dont know आप ने Nick के बारे में पढ़ा है या नहीं पर आज आप इस post को पढ़े बाद और nick को जानने के बाद आप को आपके Problem ,आप को निराशा , आप की समस्या nick के सामने बहोत छोटी नजर आएगी।  तो चलिए nick के life के  बारे में जानते है। 

निक का पूरा नाम Nick James Vujicis है और  जन्म 1982 में ऑस्ट्रेलिया में हुआ।  जन्म होते ही सब चौक गए क्यों की निक का जन्म आम बच्चो जैसा नहीं हुआ था। निक का  जन्म बिना हाथ और पैरो का ही हुआ।  जब निक का जन्म हुआ तब उसके मम्मी ने उसे देखने से और अपने पास लाने से साफ मना कर दिया था।  पर समय के साथ उन्होंने Nick को accept कर लिया। 

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Nick जन्म से स्वस्थ थे। पर सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह  थी की उन्हें हाथ और पैर नहीं थे।  दरअसल  Nick को Phocomelia नाम के दुर्लभ विकार के साथ पैदा हुए।  phocomelia में हाथ और पैरो का विकास नहीं हो पाता। 
बिना हाथ और पैरो के निक का जन्म हो गया और वे स्वस्थ भी थे।   पर उनका future कैसा होगा ? उनकी जिंदगी हमेशा दुसरो पर depend रहेगी। और वह हमेशा दुसरो पर बोझ बने रहेगे यह चिंता उनके parents को सताने लगी।  और यह सच भी है बिना हाथ पैर के कोई ज़िन्दगी कैसे जी सकता है। 

बचपन से ही Nick को अपने जिंदगी  में मुस्किले आने लगी।  उन्हें हर एक काम के लिए दुसरो पर निर्भर रहना पड़ता था खाना खाने से लेकर कपडे पहनना , स्कूल जाना , ब्रश करना और विकलांगता के कारण उनका कोई दोस्त भी नहीं बन पाया।  निक हमेशा भगवान से प्राथर्ना करते थे की कही से उन्हें हाथ पैर मिल जाए और वह भी दूसरे बच्चो के जैसे खेल - कूद सके।  पर समय बिताता गया और धीरे धीरे निक Depression और निराशा  के शिकार होते गए।  और उन्होंने आत्महत्या का प्रयास भी किया। पर वे बच गए। 



अपने mother द्वारा लिखे गए लेख से जो की अख़बार में प्रकाशित हुआ था।  उससे वह बहोत  motivate हुए और उन्हने यह समझ आया की वे अकेले नहीं  है जो संघर्ष कर रहे है। और Nick का जिदगी के प्रति  नजरिया बदल गया।   Nick के दो अविकसित पैर थे और एक पैर में दो उंगलिया भी थे पर वे आपस में चिपकी हुई थी। डॉक्टरोंने  आपरेशन कर के वह दोनों उंगलिया अलग कर दी ताकि  Nick उसकी सहायता से कुछ पकड़ सके , लिख सके और Nick उन दो उंगलियो के मदत से Wheel chair operate करने लगे वे उन दो उंगलियो से मोबाइल और computer भी operate करने लगे।  और एक तरह से Nick ने जिदगी को Challenge कर दिया। उन्होंने अपनी पढाई शुरू रखी और 21 year में ग्राफिटी यूनिवर्सिटी से अपना graduation पूरा किया। 

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2005 में एक NGO खोल दी Life without Limb नाम से और Nick ने  2007 में Attitude इस Altitude न से Motivational Speaking कंपनी खोल दी जो की लाखो लोगो को प्रेरणा और मोटिवेशन देती है। उन्होंने एक शार्ट फिल्म The Butterfly  Circus भी बनाई जिसके लिए उन्हें Best Actor का अवार्ड भी मिला है।  Nick आज लाखो लोगो को motivate करते है और वह एक बहोत अच्छे motivational speaker भी है।  और ज़िन्दगी कैसे जिया जाए यह बताते और सिखाते है।  साथ ही साथ वह एक अच्छे लेखक भी है उनकी पहली Book Life Without Limits  एक बहोत ही inspirational book है।  और 30 से अधिक भाषा में इसको ट्रांसलेट किया जा चूका है।  ऐसे बहोत सारी किताबे निक ने लिखी है। 

आज निक अपनी life में बहोत खुश है।  उनकी शादी भी हो चुकी है उनकी शादी एक बेहद खूबसूरत लड़की Kande miyahra से उनकी Love Story बेहद ही interesting और अलग है।  उनकी लव स्टोरी मैं आप के साथ फिर कभी जरूर  shar करुगा।  उन्हें दो लड़के भी है और Nick आज अपनी जिंदगी बेहद खूबसूरती से जी रहे है। 

निक अपने वाइफ और बच्चे के साथ



Nick के बारे में कुछ रोचक बाते : 

  • Nick बिना हाथ और पैरो के पैदा हुए है फिर भी वे सब कुछ कर सकते है जो एक Normal इन्सान करता है। 
  • Nick mobile चला सकते है वह computer operate भी करते है। 
  • आप को यकीन नहीं आएगा पर Nick swimming भी करते है। 
  • Nick sky driving , surfing,  four wheeler और football भी खेलते है। 
  • Nick अभी तक 58 Countries में घूम चुके है और अभी तक वे 60 लाख लोगो के सामने अपनी speech दे चुके है। 
  • Nick पेंटिंग भी करते है। 
  • Nick NGO चलाते है '' Life Without Limb '' जो की लोगो की मदत करता है।  और NGO की net worth 500000 डॉलर है।  


दोस्तों Nick से हमें बहोत कुछ सिखने मिलता है।  हम अक्सर अपने Life में Fail होता है  या कभी हम अपने लक्ष को हासिल नहीं कर पाए तो हम इसकी वजह ढूंढ लेते है।  मैं यह कर न पाया क्यों की मेरे पास पैसे नहीं थे। मैं यह exam में top नहीं कर पाया क्यों की अच्छी ट्यूशन  नहीं थी।  मैं अपने लक्ष को प्राप्त नहीं कर पाया क्यों की मुझ पर जिम्मेदारियां थी।  etc etc  हम सिर्फ बहनसायटिस हो जाते है।  हम बहाना बना लेते है की हम ऐसा क्यों नहीं कर पाए but Nick ने ऐसा नही किया उन्होंने अपने Ability पर focus किया न की अपने disability पर। 

हमारे life में भी बहोत सारी problem आती है वह problem tension हमें disable कर देती है।  और हम हार जाते है।  But Lets see Nick He dont have hand and leg और फिर भी वह आज दुसरो की मदत कर रहे है।  हमे भी अपने life और problem को निक के जैसे challenge करना चाहिए। 

आपको यह post कैसे लगी ? please आप comment  कर के हमे बताए। और ऐसे ही Inspiring और Motivational post से लिए update रहने के लिए हमारे facebook page को जरूर like करे। 




15 October 2016

मेरे शिक्षक के लिए एक सबक - apj abdul kalam

मेरे शिक्षक के लिए एक सबक - एपीजे अब्दुल कलाम 




दोस्तों आज 15 ऑक्टोबर एपीजे अब्दुल कलाम सर का जन्मदिन है।  Happy  Birthday sir, आज वह हमारे बिच नहीं है पर हमें उनके विचार उनके कार्य उनका जीवन से हमें आज भी बहोत कुछ सिखने मिलते है ! दोस्तों आज मैं आप के साथ कलाम के बचपन की एक story बताने जा रहा हु। आशा करता हु की आप को यह जरूर पसंद आएगी। 

जब कलम सर छोटे थे। वह रामेश्वरम में एक मस्जिद के रास्ते पर रहते थे। रामेश्वरम  शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। हमेशा के तरह वह शाम को मस्जिद से शाम को घर लौट रहे थे , तभी रास्ते में एक मंदिर लगा हमेशा की तरह यह उन्हें अंजान सा लगा। मंदिर आने जाने वाले  लोग उन्हें  घूरने लगे , और कुछ लोग उन्हें आश्चर्य से देखने लगे ''क्या  एक मुस्लिम लड़का यह मंदिर के पास क्या कर रहा है ? '' 

कलाम सर कहते है - पर सच तो यह है  की मंदिर में के वह तालबद्ध और मन को छूने वाले स्वर मुझे बहोत पंसद थे। ये अलग बात है की वह मंत्र मुझे समझ नहीं आते थे। पर वह मंत्र और वह की धुन में एक आकर्षण था ।  मुझे वह मंदिर मेरे बेस्ट फ्रेंड रामानंद सहस्त्रे ने बताया था ।  रामा के पिता वहा के मुख्य पुजारी थे। मैं रामा के साथ जाता और वहा देखता रहता रामा अपने पिता से साथ भजन करने बैठता और बिच बिच में मुझे देख कर हँसता रहता। स्कूल में भी हम साथ में ही पहले बेंच पर बैठते थे।वह मुख्य पुजारी का बेटा और मैं एक मुस्लिम होने के बावजूद हम   भाई- भाई के जैसे ही रहते थे। 

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एक दिन की बात है जब हम 5th क्लास में थे। एक नए शिक्षक हमें पढाने आए वह बहोत ही कठोर दिख रहे थे।  अपने हाथो में छड़ी को पकड़ थे हुए वह पुरे क्लास में घूमने लगे और हमारे सामने आ कर खड़े हो गए। 
और कहने लगे '' तुम सफ़ेद टोपी वाले तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ के मुख्य पुजारी के बेटे के साथ बैठने की ? उठो और सबसे पीछे की बेंच में जाकर  बैठ जाओ।'' मुझे बहोत दुःख हुए मेरे आँखों में से आँसू बहने लगे फ़ौरन मैंने मेरे किताबे उठाई और लास्ट बेंच पर जा कर बैठ गया। 

स्कूल की  छुट्टी के बाद  रामा और मैं बिना कुछ बाते किए रास्ते से जा रहे थे।  हमे ऐसा लगा की अब हम एक दूसरे के दोस्त नहीं रहेगे। जब मैं घर पंहुचा मेरे पापा ने मुझे रोता हुआ देखा और कहा की ''अब्दुल तुम क्यों रो रहे हो, तुम्हें क्या हुआ ? '' मैंने पापा को सब कुछ बता दिया। और रामा ने भी अपने पिता को सब कुछ बता दिया। 

दूसरी दिन सुबह सुबह रामा मेरे घर आया और कहा की मेरे पिता ने तुम्हे जल्द घर बुलाया है। मैं घबरा गया मुझे लगा की मुझपर कोई मुसीबत आने वाली है। मैं जल्द है रामा के साथ उसके घर गया। रामा के घर जाते ही मेरी धड़कने और बढ़ गयी क्यों की नए शिक्षक भी वही थे। लेकिन मुझे तब आश्चर्य हुआ जब रामा के पिता जो की मंदिर के मुख्य पुजारी थे उन्होंने शिक्षक को मुझसे माफ़ी मागने को कहा। 


रामा के पिता शिक्षक से कहते है की  भगवन की नजरोमें कोई भी बच्चा एक दूसरे से कम नहीं और  पराया नहीं  एक शिक्षक के नाते यह आप का कर्तव्य है की सभी बच्चे सामंज्यस और एकता से रहना सिखाए चाहे फिर वह कोई भी धर्म के क्यों न हो।  तुम बच्चो को शिक्षा देने के काबिल नहीं हो। 

वह शिक्षक तुरंत ही कलाम को गले लगता है और उससे माफ़ी मांगता है। और कहता है की जीवन का बहोत बड़ा सबक मुझे आज सिखने मिल रहा है। और दूसरे दिन से रामा और मैं फिर से फर्स्ट बेंच पर बैठने लगे और हम हमेशा बेस्ट फ्रेंड रहे।


30 September 2016

राजकुमारी देवी किसान चाची जिन्होंने बदल दिया है महिलाओ का जीवन

राजकुमारी देवी किसान चाची जिन्होंने बदल दिया है महिलाओ का जीवन



दोस्तों इस पुरुष प्रधान समाज में देश में हमेशा महिलाओ को दूसरा दर्जा दिया जाता है। ऐसा हमें बहोत बार देखे मिलता है।  ऐसे बहोत काम , बिज़नस , field है जो सिर्फ पुरुषो के लिए बनी है और पुरुष ही कर सकते है ऐसा भ्रम है।  पर राजकुमारी देवी जैसी महिलाऐ  बार बार ऐसे भ्रम तोड़ते है। और पुरे देश  बताती है की महिलाऐ भी किसी काम में पुरुषो से कम नहीं है।  एक अकेली राजकुमारी देवी ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिल्हे को बदल के रख दिया और पुरे देश को बदल रही है।

उन्होंने महिलाओ खेती के सहारे आर्थिक सशक्त बनाया। विधवावो का घर फिर से बसवाने कोशिश की , बालविवाह का विरोध किया।  और बिहार सहित पुरे देश का नाम रोशन किया।  सरकार ने उन्हें ''किसान श्री '' अवार्ड से सम्मानित किया है।  वह किसान श्री पुरस्कार पाने वाली पहिली महिला है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नितीश कुमार ने उन्हें सम्मानित भी किया है। तो आइए किसान चाची के बारे में जानते है।



प्रारंभिक जीवन :


राजकुमारी देवी को किसान श्री अवार्ड मिला तब से लोग उन्हें  प्यार से किसान चाची भी कहते है।  किसान चाची का जन्म एक शिक्षक के परिवार में हुवा था। उस समय जल्द ही शादी कर देते थे इलसिए मैट्रिक पास होते ही उनकी शादी एक किसान परिवार में अवधेश कुमार चौधरी से कर दी गई।  शादी के बाद वह अपने परिवार के साथ मुजफ्फरपुर जिल्हे के आनंदपुर गांव में रहने लगी।  राजकुमार देवी पहले से एक टीचर बनाना चाहती थी।  इसलिए शादी के बाद 1980 में टीचर की ट्रेनिंग भी ली।  पर समाज और परिवार का विरोध के वजहसे वह नौकरी नहीं कर पाई।

कैसे की शरुवात :

उस समय उनके गांव आनंदपुर सहित आसपास के तमाम गावो में गांजा और तंबाखू की खेती हुवा करती थी।  सब लोग तंबाखू और गांजे के खेती किया करते थे।  गांव के सब लोग नशा करते थे और सभी को नशे के अदि हो चुके थे। इस वजह से बहोत से परिवार में झगडे अशांति महिलाओ से मारपीट अत्याचार होता था।  यह देख राजकुमारी देवी को बहोत दुःख होता था। और वह कुछ करना चाहती थी।  उन्होंने सोचा क्यों न नशे की खेती के बजाए लोग दूसरी खेती करे ?


राजकुमारी देवी खेती को बदलने के बारे में सोचने लगी। खेती को लोग घाटे का सौदा मानते है इसलिए सब नशे की खेती करते थे।  उन्होंने सोचा कोई दूसरी खेती किया जाए जिसमे मुनाफा बहोत हो  और गांजे की खेती भी बंद हो जाए साथ ही साथ महिलाओ पर होने वाले अत्यचार भी रुक जाए। राजकुमारी देवी ने फलो के खेती के बारे में सोचा  पहले  '' खुद तकनीके ज्ञान लुंगी और बाद में लोगो को यह खेती करने को प्रोत्साहित करुँगी''।  और उन्होंने अपने घर से फलो और सब्जी के खेती करने का फैसला लिया।

उस वक़्त उनके घर की औरते कभी काम करने बाहर नहीं जाया करती थी । ससुर का विरोध भी था। बावजूद किसान चाची ने हार नहीं मानी और अपने काम में जुट गई। अपने घर की खेती में उन्होंने लीची , पपीता ,केले ,आम ,सब्जी  की शुरवात कर दी  और जल्द ही उन्हें इसमें कामियाबी भी मिल गई।


 गांव में पहली बार किसी ने फलो की खेती की शुरुवात तो कर दी पर पुरे गांव को मनाना बहोत ही मुश्किल था। उन्होंने गांव के लोगो को महिलाओ  तंबाखू और गांजे के खेती के नुकसान के बारे में बताना शुरू कर दिया और अपने फलो और सब्जी के खेती का मुनाफा बताया।  कई लोग उनका मजाक भी उड़ाते थे। और उन्होंने अपना प्रयास जारी रखा। और वह आसपास के गावो में साइकिल से जा जा कर वहा के महिलाओ  खेती का तकनीके ज्ञान देती है। वह हर रोज 30 से 40 किलोमीटर साइकिल चला चला कर सब को अपना अनुभव बताने लगी और उन्ह भी यह खेती करने के लिए प्रोताहित करने लगी। लोग उन्हें साईकिल चाची भी कहते है।

उस समय महिलाए खेती में सिर्फ मजदूर के लिए ही किया जाया करती थी।  किसान चाची ने महिलाओ को खेती करने और खेती का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रोत्साहित किया।  और उनका यह काम 20 साल से शुरू है।  किसान चाची 25 -30 तरह तरह प्रकार के आचार और मुरब्बा भी बनाती है।  और 5 10 रूपये में बिकने वाला आचार आज हजारो में बिकने लगा है। 



किसान चाची ने अपनी जिद नहीं छोड़ी और अधिक से अधिक महिलाओ  वह जोड़ने लगी।  किसान चाची उन्ही हर प्रकार का प्रशिक्षण लिए प्रोत्साहत करती। उन्हें हर प्रकार की मदत करती। सब महिलाओ को एकजुट किया और  स्वयंसहायतां ग्रुप बनाया ताकी स्वयं सहायता से खेती को बढ़ावा मिले।  स्वर्ण जयंती ग्राम योजना तहत लोन भी मिल गया।  और उनके ग्रुप को बढ़ावा मिलने लगा।  धीरे धीरे उनके साथ लोग जुड़ने लगे। 

 कोई मेले या शिबिर गांव में वह अपने उत्पाद अचार, मुरब्बा के स्टाल लगाती है और सब लोगो को वह प्रोत्सहित  करती है । किसान चची के मेहनत रंग लाने लगी। यहाँ से किसान चाची को सब लोग जानने लगे और उनकी तकनीक को धीरे धीरे अपनाने लगे,    कुछ ही दिनों में आस पास के गांव किसान चाची के तकनीक का इस्तेमाल करने लगे। और पुरे बिहार और भारत में वह किसान चाची के नाम से मशहूर हो गई। 



 राजकुमारी देवी हमेशा कोशिश करती है की जो भी खेती की जाए उसमे कम से कम किटकनाश का इस्तेमाल किया जाए। वह सिर्फ जैविक खातो का ही इस्तेमाल करती है और उसे ही बढ़ावा देती है। किसान चाची का कहना है की कीटनाशक का इस्तेमाल कर के उत्पाद तो बढ़ाया जा सकता है पर जो उत्पाद हम खायेगे उसका असर हमारे स्वास्थ पर ही होगा। इसलिए सिर्फ जैविक खाद के तकनीक से ही किसान चाची अधिक से अधिक उत्पाद लेती है। 

उपलब्धिया :

आज किसान चाची की खुद की मेहनत और लगन पुरे महिलाओ का जीवन बदल दिया है उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और खेती में नयी तकनीक लायी जिसने  समाज गांव  और पुरे देश  के लोगो को एक प्रेरणा दी है। महिलाएं कुछ भी कर सकती है वह परुषों से जरा भी कम नहीं है। 

किसान चाची के लगन को देख कर उन्हें उन्हें बहोत सम्मान और पुरस्कार मिल रहे है।  उन्हें '' किसान श्री '' अवार्ड से भी नवाजा गया है।  और वह यह सम्मान पाने वाली पहली महिला है। और पुरे देश को राजकुमारी देवी पर गर्व है। 

राजकुमारी देवी का सपना है की देश की हर महिला स्वावलंबी बने।  वह दुसरो पर निर्भर ना रहे।  समाज में अपनी पहचान बनाए। और महिलाओ  के प्रती समाज और देश की सोच बदले।  बच्चियों और महिलाओ  को पढ़ने का मौका मिले। 


25 September 2016

दुनिया का Youngest CA (Chartered Accountant) राजकुमार राजन

दुनिया का Youngest CA (Chartered Accountant) राजकुमार राजन 


worlds youngest C.A. Rajkumar rajan in Hindi


 दोस्तों CA  को हम बहोत ही मुश्किल मानते है और देखा गया है की उसका syllabus बहोत ही Hard और उसे पूरा करने में सालो की मेहनत लग जाती है।  और सालो की मेहनत के बावजूद CA में सफलता नहीं मिलती।  पर सिर्फ 18 वर्ष की उम्र CA बनने वाला राजकुमार राजन दुनिया का youngest छात्र बन गया है। आम तौर पर 12 हुए बाद Graduation को 18 साल से शुरुवात होती है।  पर राजकुमार ने सिर्फ 18 की उम्र में ही CA हो गया।  तो आइए हम जानते है की आखिर राजकुमार है कोन और उसने अपनी सफलता कैसे पाई।


राजकुमार रामन मूल रूप से चेन्नई का रहनेवाला है।  वह दुबई में भारतीय स्कूल में अपनी पढाई शुरु की है।  राजकुमार कहता है ही वह अपनी मेहनत के दम पर यह कारनामा कर के दिखाया है।  उसने  15 साल की उम्र में ही अपनी CA की पढ़ाई शुरू कर दी थी।  14 -15 वर्ष हमारे खेलने कूदने के दिन होते है।  और इस खेलने कूदने के दिन में ही राजकुमार ने अपनी CA की पढ़ाई शुरू कर दी थी। इस छोटी सी उम्र में अपने सपने साकार करने के लिए राजकुमार जी तोड़ मेहनत करता था।  वह बाकी बच्चो के जैसे खेलता नहीं था या छुट्टियां नहीं मनाता था। बस अपने लक्ष पर ही वह हमेशा ध्यान केंद्रित करता था। और उसकी मेहनत रंग भी लायी है।


जहा CA बनने में कई वर्ष लग जाते है। वही राजकुमार ने अपनी मेहनत के दम पर सिर्फ ३ वर्षो में 2015 में पहले ही attain में यह परीक्षा पास कर ली है। और वह दुनिया का सबसे कम उम्र वाला CA  बन चूका है। राजकुमार कहता है की CA बनने के लिए उसने जीतोड़ मेहनत की है।  वह हमेशा regular पढाई करता था।  वह कोई छुट्टी नहीं बनाता था।  सिर्फ regular basis पर पढ़ाई कर के ही उसने यह मुकाम पाया है।

राजकुमार कहता है वह 3- 4 बजे तक कॉलेज करता था।  और बाद में घर आ कर थोड़ा आराम और lunch फिर 4 .30 से 8 .30  वह अपनी पढ़ाई करता था। और फिर थोड़ा ब्रेक और dinner कर के 9 बजे से रात 12 बजे तक वह अपनी पढाई करता था।  वह ऐसा रेगुलर करता आ रहा था। यही उसकी सफलता का राज है।

राजकुमार को Finance और Accountancy इन दो subject में बहोत interest  है, इन दो subject में knowledge पाने के लिए ही वह CA करना चाहता था।  पर इतने जल्द सफलता मिल जाएगी यह उसने भी नहीं सोचा था। राजकुमार के परिवार के बहोत सारे लोग CA है इसलिए बहोत सी motivation और ज्ञान उसे अपने घर से ही मिला। राजकुमार पर CA बनने का एक जूनून छा गया था। collage को जिस दिन छुट्टी रहा करती थी उस दिन बाकि student घूमते खेलते पर राजकुमार सुबह 6 बजे से अपनी पढाई को लग जाता था। 


राजकुमार थोड़ा Superstitions और थोड़ा नसीब को मानता है।  वह कहता है की लक मेरा साथ दे इसलिए मैं exam में एक ही शर्ट और एक ही पैंट पहेनता था।  और मेरे जूते और मोज़े भी मैंने कभी नहीं बदले। यहाँ तक मैं अपना भोजन भी एक ही type का करता था।  चावल और आमटी। और मेरे लक और मेहनत से ही मुझे यह सफलता मिली है। 


आज राजकुमार इतनी छोटी उम्र में CA बन गया लेकिन उसकी पढ़ाई में कम नहीं आई है। अब राजकुमार को अमेरिका जाकर MBA करना है। उसके बाद वह investment marketing में अपना Career करना चाहता है।  राजकुमार के सपने बहोत बड़े बड़े है पर उसकी मेहनत और लगन से वह उसे पूरा कर देगा इसमें कोई शक नहीं।


3 August 2016

व्हीलचेयर ब्यूटी दिव्या अरोरा

व्हीलचेयर ब्यूटी दिव्या अरोरा 

Wheelchair Beauty Divya Arora in Hindi


जिनके अंदर कामियाब होने की दृढ़ इच्छाशक्ति होती है वे किसी भी हालात का मुकाबला कर लेते है और कठिन से कठिन जंग जीत लेते है।  फिर चाहे कोई गंभीर बीमारी ही क्यों न हो।  इसलिए कभी भी किसी बीमारी के आगे समर्पण नहीं करना चाहिए।  अगर बहादुरी से डटकर मुकाबला किया जाये तो नाइलाज बीमारी को भी धुल चटाया जा सकता है।  कहा भी जाता है की बहादुर लोगो की  मदत भगवान करता है।  हिम्मत न हारनेवाली दिव्या अरोरा की कहानी बड़ीप्रेरणादायी और भावनापूर्ण है।  दोस्तों मैंने आज दिव्या अरोरा की Story पढ़ी और मुझे बहोत अच्छी लगी so मैं आप सब से साथ Sher  कर रहा हु।



साल 2013 में Miss Wheelchair Beauty Contest की सुंदरी दिव्या अरोरा Cerebral Palsy यानी दिमागी लकवे बीमारी  रहे लोगो  के लिए प्रेरणास्रोत्र है।  आइये जानते है Precedent award पा चुकी दिव्या की कहानी।

बचपन से ही बीमारी के कारण बहोत परेशानियों  का सामना करना पड़ा।  आज भले ही वो आर्थिक दृष्टि से बेहतर पोजीशन में है ,लेकिन पहले ऐसा नहीं था Cerebral Palsy के बारे में यहाँ जागरूकता न होने से वे थोड़ी खिन्न रहती थी।  दिव्या कहती है '' अपने देश में Cerebral Palsy को लेकर लोगो में जागरूकता की बहोत कमी है ''  बचपन को याद करते हुए वो कहती है, '' शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद बचपन में मेरा आयक्यू  स्तर आम बच्चो की तरह था।  मैं इसका भरपूर इस्तमाल करना चाहती थी।  लिहाजा मैंने उच्च शिक्षा हासिल करने का फैसला किया मैंने तय कर लिया था की अपनी शारीरिक अक्षमता को आड़े नहीं आने दूँगी।

समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री पानेवाली दिव्या की जिंदगी के प्रति सोच सकारात्मक है ,वह कहती  है , ''Cerebral Palsy के चलते मैं बचपन से ही व्हीलचेयर पर हु , डॉक्टरों ने कहा है की , जीवन भर मेरे हालात ऐसी ही रहेगी लेकिन मुझे कोई गम नहीं , क्यों की मेरा हौसला मेरी इच्छाशक्ति मेरे साथ है।  इसलिए मेरे अंदर की दिव्या बीमारी के आगे हथियार डालने से साफ मना कर चुकी है। वह जीवन से बेपनाह मोहब्बत करती है और जीवन भरपूर जीना चाहती है।

Wheelchair Beauty Divya Arora in Hindi


 सच पूछो तो मौत का अलिगंन करने तक मैं 18 साल की बनी रहना चाहती हु।  दरअसल मेरा बचपन आम बच्चो जैसा नहीं रहा।  मेरी ढेर सारी ख्वाइश थी। मैं खेलना चाहती थी।  मौज -मस्ती करना चाहती थी , लेकिन अपनी सेहत के कारन ऐसा नहीं कर पाई। ''



दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से डबल मास्टर डिग्री हासिल करनेवाली दिव्य अरोरा पिछले सात साल से मुंबई में है।  दरअसल वह फिल्म निर्देशक बनना चाहती है।  उन्होंने एक कहानी लिखी है।  अब उसी पर फिल्म बनाने उनका इरादा है।  इससे पहले दिव्या 80 के दशक में बनी शिव का इंसाफ में बतौर बाल कलाकार और साल 2011 में आई अनुराग कश्यप की शैतान में रुपहले पर्दे पर दिख चुकी है।


दिव्या के लिए सबसे  गौरवशाली लम्हा वह था जब 24 नवंबर 2013 को मुंबई में हुई ''मिस इंडिया व्हीलचेयर'' प्रतियोगिता में प्रथम रनअप रही।  '' मेरे लिए वह बेपनाह ख़ुशी का लम्हा था लेकिन मुझे उससे जड़ कामियाबी हासिल करनी है '' उनके लिए दूसरी बार ख़ुशी का पल वह रहा , जब संजय लीला भंसाली ने उन्हें फिल्म गुजारिश में ऋतिक रोशन को ट्रेनिंग देने का आग्रह किया।  क्यों को फिल्म में ऋतिक को भी ऐसे ही एक बीमारी से पीड़ित युवक का किरदार निभाना था। 


दिव्या ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अपनी पढाई पूरी की और वो अपने बैच में टॉपर रही।  वह कहती है ''मुझे कभी भी नंबर दो Position पसंद नहीं।  मेरा मानना है की जो भी करो उसमे अव्वल नंबर रहो।  दरअसल मैं बहुमुखी प्रतिभा की पुलिंदा हु।  बेशक मैं शारीरिक रूप से विकलांग हु ,परंतु मेरी काबिलियत मेरी असमर्थता के साए से बहुत दूर है।  मैं जीवन में आर्थिक आज़ादी की प्रबल पैरोकार हु।  इसलिए लगातार काम की तलाश में रहती हु।  मुझे कई आने जाने में कोई दिक्कत नहीं होती , इस मामले में पूरी तरह आज़ाद हु। ''


 ''मैं संजय लीला भंसाली के संपर्क में गुजारिश से पहले से ही थी ,जिसमें रानी मुखर्जी ने नेत्रहीन ,मूक और बधिर लड़की का किरदार निभाया था।  एक Disable Activity के नाते मुझे फिल्म की कई बाते पसंद नहीं आई।  मैंने संजय को फ़ोन कर बता दिया।  उन्हें मेरे सुझाव अच्छे लगे।  मैं उनसे 2009 में मिली और हम धीरे धीरे दोस्त बन गए।  इसलिए जब वो गुजारिश बना रहे थे तो बतौर सलाहकार उन्होंने मुझे फिल्म में मौका दिया।  उन्होंने बताया की ऋतिक एक बीमार युवक का किरदार कर रहे है।  इसलिए वह मुझसे training लेना चाहते है।  हालांकि उस समय मैं दिल्ली में रह रही थी।  लिहाज संजय ने मुझसे पूछा की ऋतिक दिल्ली आ जाये या मैं मुंबई आऊँगी ? तब मैंने फ़ौरन मुंबई आने का फैसल किया , क्यों की मुंबई मेरा ड्रीम शहर है। ''
 
दिव्या आगे बताती है ,'' शुरुवाती चरण में ऋतिक ने मेरी बीमारी से जुडी हर जानकारी पर गंभीरता से गौर किया , मसलन मैं कसी तरह अपना जीवन जी रही हु , मेरी दिनचर्या क्या है आदि।   मै तो कहूंगी की ऋतिक पूरी तरह से निर्देशक और अभिनेता है।  लिहाज उन्होंने Cerebral Palsy बीमारी के बारे में मुझसे काफी जानकारीयां ली।  उन्हें पता था की इस बीमारी के बारे में उन्हें केवल ,मैं जानकारी दे सकती हु।  वह बेहतरीन Student है।  गुजारिश की Shooting के दौरान वो हमेशा  मेरे साथ ही रहते थे।  मैं कैसे बात करती हु , मेरे हाव -भाव सब उन्होंने नोटिस किए और पर्दे पर उन्हें बेहतरीन तरीके से उतारा।  ऋतिक ने गुजारिश में कमाल का अभिनय किया।  उन्होंने फिल्म में वो सब किया जो मैं रोजाना अपने जीवन में करती रही हु। ''


दिव्या कहती है की ,'' मुझे राष्ट्रपती पुरस्कार मिला है।  बतौर अभिनेत्री , रायटर , डायरेक्टर  मैं पिछले 12 साल से ज्यादा समय से print एवं web और दूसरे माध्यम के लेखन Writing कर रही हु और मैं wheelchair से ही मंच पर राज कर रही हु।  मैंने collage के दिनों में 25 से ज्यादा नाटको का निर्देशन किया था। ''

'' कई -कई रात मैं बिल्कुल नहीं सो पाती।  मैं  अपने लेखन में इतना रम जाती हु की कब रात बीत जाती है मुझे पता ही नहीं चलता।  हालांकि सुबह नींद  खुलते ही मैं जीवन में अपने मकसद के बारे में सोचती हु।  और अपने जीवन में आई खुशियो और प्यार के बारे में सोचती हु।  उसके बाद मैं  तैयार होती हु।  और जुहू में अपने Office जाती हु।  मैं Taxi लेती हु जो मेरा इंतजार करती है।  दिव्या मोरानी समूह के सिनेयुग एंटरटेनमेंट नाम की कंपनी में Creative Associate है।  वो कहती है की मुझे इस Group के साथ काम करने में बड़ा गर्व महसूस होता है ''क्यों की उन्होंने मेरे Creative Talent का इस्तेमाल किया। ''

अभिनेत्री ,डायरेक्टर ,कवयत्री ,संगीतकार ,पेंटर,एक्टिविस्ट ,मॉडल ,और भाषाविद दिव्या अपनी माँ को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा और दोस्त मानती है।  दिव्या को बहोत से languages आती है जैसे English ,French , Hindi ,Punjabi,Bengali ,और Nepali दिव्या कहती है की मेरी माँ मेरे लिए सब कुछ है मेरे प्रेरणा मेरे दोस्त वही है। 

2 August 2016

स्नेहा शर्मा हवा से बाते करती लड़की

 Fastest women racer स्नेहा शर्मा  हवा से बाते करती लड़की 

 Fastest women racer sneha sharma in hindi
16 वर्ष की उम्र से रेसिंग कर रही है स्नेह शर्मा


16 वर्ष की उम्र से रेसिंग करती स्नेहा शर्मा आज एक Professional Pilot है आज इनकी Story कई लड़कियो को inspire करती है।  बचपन से ही रेसिंग से Passionate रही स्नेहा को आज पूरी दुनिया जानती है।

 ''इंडियास फास्टेस्ट वुमन रेसर'' कही जाने वाली स्नेहा  शर्मा पेशे से पायलट है।  बचपन से स्पीड में दिलचस्पी रखने वाली स्नेहा शुरुवात में साइकिल रेस में हिस्सा लेती थी।  बड़ी हुई तो कार रेसिंग की तरफ झुकाव हुआ।  उन्होंने रेसिंग का कोई प्रशिक्षण नहीं लिया , लेकिन पढाई के दौरान शौकिया की वे कही स्थानिक Event  में हिस्सा लेने लगी। 

 दुर्घटनाओ को जोखिम व पढाई से ध्यान न हट जाए ,इस डर से मातापिता ने उन्हें रोकने की बहोत कोशिश की।  parents को मनाने के लिए वे रेसिंग के दौरान किताबे भी साथ ले जाती थी। पायलट होने के साथ किसी तरह उन्होंने अपने रेसिंग के जूनून को भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुचाया। 


स्नेहा नौकरी करके परिवार की मदत करना चाहती थी , पायलट का Profession उनके शौक से मेल खाता था इसलिए उन्होंने इस क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया।  2008  में फ्लाइंग ट्रेनिंग लेने के लिए वो कैलिफोर्निया चली गयी। एक साल बाद आकर उन्होंने US के फ्लाइंग लायसेंस को भारत के लायसेंस में परिवर्तित कराया।  इस प्रकिया में उन्हें करीब २ साल  का वक़्त लगा। 

इस दौरान वे अपने रेसिंग के शौक को पूरा करने के  लिए स्थानिक प्रतियोगिताओ में हिस्सा लेती रही।  2009 में उन्हें पहली बार एक निजी company ने National Level की National Four Stroke Go Carting Championship के लिए Sponsor किया। इस  Championship में स्नेहा ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।  इस के बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 


Mercedes Young Star driver Program के दौरान उन्हें India's Fastest women का किताब मिला।

2012 में उन्हें एक एयरलाइन्स में अंतरराष्ट्रीय   फ्लाइट के Pilot के रूप में नौकरी मिल गयी। 

फिट रहने के लिए रोजाना 2 घण्टे का Work-out 

स्नेहा कहती  है की रेसिंग भी Sports का हिस्सा है।  इसमें अक्सर चोटिल होने का खतरा रहता है।  कई बार उन्हें  फैक्चर मासपेशियो  और गर्दन  चोट लग चुकी है।  इस स्थिति से निपटने के लिए शारारिक रूप से मजबूत होना जरुरी है। स्नेहा रोजाना समय मिलने पर  Running, jogging,push-ups,Swimming,Power योगा सहित 2 घंटे का  Workout करती है। Diet में chicken , अंडे,फल ,हरी सब्जिया , प्रोटीन विटामिन के साथ sugar Free आहार लेती है। 

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  शरीर को रेसिंग के लिहाज से फिट बनाने  स्नेहा ने Exercise और Diet के बौदोलत अपना वजन को 90 किलो से घटाकर 60 किलो किया। 

छुट्टियों के दौरान रेसिंग 

नौकरी में छुट्टियों के दौरान जब उनके साथी Enjoy करते थे  वे रेसिंग करती थी।  उनकी लगन क्षमताओ को देख कर 2014 में एयरलाइन्स भी उनकी मदत के लिए सामने आ गयी।  स्नेहा अब तक 9 category की विभिन्न चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी है।  इनमे 6 National वो जीत चुकी है।  14  run up रही है।  


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14 July 2016

करसनभाई पटेल निरमा डिटर्जेंट पाउडर वाले real Story

करसनभाई पटेल निरमा डिटर्जेंट पाउडर वाले real Story 



Real sucess story of karsanbhai patel in Hindi


Name           : करसनभाई खोडिडास पटेल  ( के . के. पटेल )

Date of Birth : १९४५ गुजरात 

Nationality    : Indian 

Occupation    : Businessman & CEO of Nirma Detergent powder.

Turnover        : 7000 crore per years 

Achievement  :  1988 गुजरात Businessman Award 
                        
                       1990 (FASII) Federation of Association of    
                        small scale industry of India द्वारा ''उद्योग रत्न'' से 
                        सम्मानित किया गया। 
                      
                        2001 florida Atalatik University के द्वारा Doctorate 
                        Degree से सम्मानित किया गया। 
                        
                        2009 Forbes magazine में 92 rank में Indian Richest
                        Person में अपनी जगह बनाई 
                       
                       2010 राष्टपति प्रतिभाताई पाटिल द्वारा ''पद्म श्री '' अवार्ड
                       से सम्मानित किये गए। 

                       दुनिया की २ री सबसे बड़ी सीमेंट company ''लाफार्ज
                       इंडिया'' को निरमा  9400 करोड़ में ख़रीदेगा । 

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दोस्तों , निरमा को आज बच्चा बच्चा जानता है।  निरमा डिटर्जेंट पाउडर आज लगबग हर घर में Used किया जाता है।  अगर आप को याद होगा तो आपने निरमा का पहला Ad जरूर देखा होगा।  एक छोटी सी लड़की सफ़ेद फ्रॉक में दिखाई देती थी। वो निरमा की पहली टीवी Ad थी। आज तो Market  में कितने सारे Product  आ चुके है पर जो जगह निरमा ने बनाई है, उस मुकाम तक शायद ही कोई पहुंच पाएेगा। ये सब मुमकिन हुआ सिर्फ करसनभाई की सालो की मेहनत से।  

करसनभाई पटेल  का जन्म एक किसान परिवार में हुआ।  वो घर के इतने अच्छे नहीं थे। करसनभाई ने प्रांरभिक शिक्षा गुजरात में ही की और अपना Graduation बी.एससी में किया।  उनके सपने तो बहोत बड़े थे, पर घर की जिम्मेदारी और हालात की वजहसे उन्हें मिल्स में नौकरी करनी पड़ी।  

करसनभाई नौकरी तो करते पर उन्हें कुछ दूसरा करना था।  वो बहोत महत्वाकांक्षी थे, इसलिए उन्होंने कुछ दूसरा करने का सोचा पर उन्होंने अपनी नौकरी नहीं छोड़ी।  और एक दिन उन्हें निरमा का  Idea  आयी।  

1969 में करसनभाई ने निरमा की शुरवात कर दी थी।  उस समय उनके पास कोई जगह नहीं थी तो अपने घर से ही उन्होने निरमा बेचना शुरू कर दिया। 

पुरे दिन वो नौकरी पर जाते और शाम को खुद अपनी साइकिल पे गली गली जा कर निरमा बेचते थे।  इस काम की शुरवात उन्होंने खुद अकेले ही की और अकेले ही निरमा बेच भी आते थे। 



वह निरमा बहोत काम भाव में बेचते थे और इतने काम दरों में Quality भी अच्छी देते थे।  तीन सालो में उन्हें भरोसा आ गया की वो अब अपना पूरा समय अपने Business  में दे सकते है इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरा ध्यान अपने Business पर देना शुरु कर दिया।  

अहमदाबाद में करसनभाईने एक workshop खोला धीरे धीरे निरमा पुरे गुजरात में प्रसिद्ध हो गया।  और महाराष्ट्र में भी तेजी से बिकने लगा।  '' निरमा '' नाम उन्होंने अपने बेटी निरुपमा के नाम पे रखा था और सारी दुनिया इस नाम को जानती है।  

Real sucess story of karsanbhai patel in Hindi


1994 में करसनभाई ने (NERF )  Nirma Education and Research foundation की Higher Education को मदत करने  स्थापना की।
 1995 में करसनभाई ने Nirama Institute Of Technology की शुरवात अहमदाबाद में की है।  
 1996 Institute Of Management की स्थापना की। 
2003 में ये तीनो Institute के Marg से University की स्थापना की।  



आज निरमा India का Top Brand बन चूका है।  करीब 18000 employee यहाँ काम करते है और निरमा का सालाना Turnover 7000 करोड़ है।  निरमा  के साथ करसनभाई ने और दूसरे Product भी Launch किए है।  जैसे Beauty soap ,बर्तन cleaner, costic Soda , शुद्ध नमक, cement , और Packaging. 


और Recent में निरमा के सबसे बड़ी उपलब्घि यह है की   दुनिया की २ री सबसे बड़ी सीमेंट comany ''Lafarj India '' को 9400 करोड़ में ख़रीदेगा

 Lafarj India  दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट company Lafarj Holesim की भारतीय Unit है।  और जल्द ही ये अब निरमा company का हो जायेगा।  

हेमा,जाया, रेखा और सुषमा सबकी पसंद निरमा .... 

10 July 2016

गौतम बुध्द life story in Hindi

mahatma gautam buddha history in hindi
mahatma gautam buddha history in hindi


पूरा नाम    : सिद्धार्थ गौतम 
जन्म         : ५६३ इ. पु.
पिता         : नरेश शुद्धोधन 
माता         : रानी महामाया 
जन्मस्थल : लुम्बिनी नेपाल
शिक्षा        : गुरु विश्व्नाथ के पास वेद  और उंपनिषद  पढ़े 
विवाह       : यशोधरा के साथ 
पुत्र           : राहुल
मृत्यु        : ४८३ ई. पु.


दोस्तों  भगवान गौतम बुध्द की life story के बारे में जानने वाले है।  सिद्धार्थ का जन्म एक बहोत बड़े घराने में हुआ था।  उनके पिता शाक्य गन के मुखिया थे।  उनका जन्म लुंबिनी नेपाल में हुआ था।  जन्म से ही सिद्धार्थ के शरीर पर निशान था।  जन्म के ७  बाद ही उनकी माँ महामाया का देहात हो गया।  इसके बाद उनका पालन पोषण उनकी सौतेली माँ प्रजापति गौतमी ने किया , माँ गौतमी के द्वारा पाले जाने से उन्ही गौतम कहा जाने लगा।  


सिद्धार्थ के जन्म समारोह में ही एक महान साधु ने यही घोषणा की थे की यह एक महान मनुष्य बनेगा। संसार के दुखो का उसे ज्ञान होगा और राजपाठ छोड़के वह ज्ञान की तलाश में चला जायेगा।  उसका नाम सिद्धार्थ रख गया जिसका अर्थ है की जो सिद्धि प्राप्ति के लिए जन्मा हो बचपन से ही सिद्धार्थ बहोत कोमल और दयावान स्वाभाव के थे।  बचपन में सिद्धार्थ अपने चचेरे भाई देवदत्त के द्वारा बाण  से घायल हंस को बचाया और अपने भाई से झगड़ा किया और हंस की रक्षा की, मारने वाले से बचने वाला महान होता है। 


महाराज  को हमेश गौतम की चिंता लगी रहती थी। राजा को लगता था की गौतम को संसार के दुखो की पहचान हो गयी तो वह राजपाठ छोड़ देगा इसलिए उन्होंने सामान्य जीवन से दूर रकने के लिए एक वैभवशाली महल बनाया।  जब  सिद्धार्थ १६ साल के हुए तब उनका विवाह दंडपाणि की कन्या यशोधरा से हुआ , पिता द्वारा ऋतुवो  के अनुरुप बनाए गए वैभवशाली और भोग-विलास यूक्त महल में वो यशोधरा के साथ रहने लगे।  यहाँ उनके  पुत्र राहुल का जन्म हुआ।  उन्हें महल में किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी। 


गृह त्याग और ज्ञान प्रप्ति :

एक दिन सिद्धार्थ ने महल से बाहर जाने की इच्छा व्यक्त की और महाराज ने उन्हने बाहर जाने की अनुमती दी ,जब सिद्धार्थ कपिलवास्तु की सैर पे निकले तो उन्होंने चार दृश्यों को देखा :

१ ) बूढ़ा व्यक्ति 
२)  बीमार लाचार व्यक्ति 
३ ) शव 
४) सन्यासी 


इन दृश्यों ने सिद्धार्थ को विचलित कर दिया।  वो बूढ़ा आदमी जिसके शारीर सुख गया था, दाँत टूट गए थे, बाल पक गए थे , वो रोगी जिसका चेहर पिला पड़ गया था, सासे फूल रही थी ,जो दूसरों के सहारे चल रहा था ,वो अर्थी जिसे चार आदमी अपने कंधे पे उठा कर ले जा रहे थे। सिद्धार्थ ने सोचा धिक्कार है ऐसे जवानी पर जो साथ छोड़ देती है।  धिक्कार है ऐसे स्वास्थ पर जो शरीर को नष्ट कर देता है , धिक्कार है ऐसे जीवन   पर जो खत्म हो जाता है पर जब सिद्धार्थ ने सन्यासी को देखा जो संसार की सारी भावनावो  से मुक्त था और बहोत खुश था उसने सिद्धार्थ को आकर्षित किया। अंत : उनका जीवन वैराग्य की तरफ मूड गया।  और वे सबकुछ त्याग ने की इच्छा जाहिर की पर महाराज ने उन्हें साफ मना कर दिया।  


एक रात वो अपनी पत्नी और अपने पुत्र को सोता हुए छोड़ कर गृह त्याग कर ज्ञान के खोज में चल पड़े। और वह तपस्या करने लगे।  वह भिक्षा मंगाते और तपस्या करते।  वह मगध की राजधानी में आलार और उद्रक दो ब्राम्हण से ज्ञान प्रप्ति का प्रयत्न किये और ध्यान लगाना सीखा पर उनको संतोष नहीं मिला। उरवले पहुंचे वाह तरह तरह की तपस्या की पर उन्हें समाधान नहीं हुआ और  वह वहा  से चल पड़े। 


इसके बाद सिद्धार्थ गया (बिहार ) पहुंचे वह एक वटवृक्ष के निचे समाधी लगायी और प्रतिज्ञा की जब तक ज्ञान प्राप्त नहीं हो जाता तब तक यह से नहीं हटुगा। सात दिन और सात राते समाधी में रहने के बाद आठवें दिन वैशाख पूर्णिमा के दिन  सिद्धार्थ को सच्चे ज्ञान की अनुभूति हुई। वैशाख पौर्णिमा को ही हम गुरु पूर्णिमा कहते है और जो लोग बुद्ध को मानते है उनके लिए ये बहोत बड़ा त्यौहार है।  


बोधि वृक्ष


जिस वृक्ष के निचे ज्ञान प्राप्त हुआ उसे ''बोधि वृक्ष '' कहते है। तथा गया को बोध गया कहा जाता है। भगवान बुद्ध ८० उम्र तक सभी नगरों में जा जा कर अपने विचारों को प्रसारित करते रहे और सभी लोगो अपना सन्देश देते रहे।  वह संस्कृत की जगह उस वक़्त की सरल भाषा पाली में प्रचार करते रहे। 

पाली सिद्धांत के महापरिनिर्वाण सूत्र के अनुसार ८० वर्ष की आयु में भगवान बुद्धने घोषण की की वे अब जल्द ही परिनिर्वाण होगे और वे ब्रम्हांड में लीन हो गये। और कहने लगे की मेरा कार्य पूर्ण हो चूका है।शरीर नश्वर है शरीर से प्रेम मत करो।  मेरे बताए हुए मार्ग पर चलो और ईश्वर की प्राप्ति करो।  

भगवान बुद्ध का निर्वाण समय अब समीप आ गया था उन्होनों  अपने शिक्ष को एक सेज सजाने को कहा और उस पर निद्रिस्त हो गए उनके और अपने शिक्ष को कहने लगे यह उनके अंतिम शब्द '' मेरे पुत्रो मै इस संसार में मनावत का  पाठ पढ़ाने के लिए आया था।  मुझे लोग पूछते है की ईश्वर कहा है ? वह तो हर जगह है सभी प्राणी मात्रा में उसका संचार है। मैंने मानवता  के मुक्ति के लिए अपना जीवन अर्पित किया। इसके बाद मै नहीं ऐसा कभी मत समझना मेरा पठण सदैव तुम्ह गुरु स्थान दिखायेगा। जीवन के प्रत्येक क्षणों में कार्यरत रहना। हर बात सत्य से करो  धर्म की शुद्धता , भाषा की शुद्धता तथा हर कार्य में सत्यता का प्रमाण दिखना और जो कुछ भी मैंने सिखाया है उसे याद रखना और उस मार्ग पर चलना। 

 
बुद्धा धर्म के बारे में कुछ और जानकरी : 

बुद्ध धर्म दुनिया का ३ रा सबसे बड़ा धर्म है। 

जो बुद्ध धर्म के अनुयायी है उनके लिए सबसे पवित्र त्यौहार बुद्ध पूर्णिमा है। 

जिस स्थल पर सिद्धार्थ का नामकरण समारोह किया गया था।  लुंबिनी के उस स्थल पर महाराज अशोक ने जन्म स्मृती में एक स्तम्भ बनवाया। 
सबसे जादा बुद्धा का प्रचार सम्राट अशोक ने ही किया। 



भगवान बुद्ध ने निर्वाण प्राप्ति के लिए १० चीजों पर जोर दिया है 
१ ) अहिंसा 
२ ) सत्य 
३) चोरी न करना 
४) किसी भी प्रकार की संपत्ति न रखना 
५) शराब का सेवन न करना 
६ ) असमय भोजन करना 
७) सुखद बिस्तर पर न सोना 
८) धन संचय न करना 
९) महिलावो से दूर रहना 
१० ) भोग -विलास से दूर रहना 

सांसारिक  दुखो से मुक्ति के लिए भगवान बुद्ध  की शिक्षा 

सम्यक दुष्टिसम्यक दुष्टि का अर्थ है की जीवन में सुख- दुःख आते रहेंगे हमें अपने नजरिये को सही रखना चाहिए। 

सम्यक संकल्प : जीवन में जो काम करने के योग्य है।  जिससे दूसरों का भाला होता है हमें उसे करने का संकल्प लेना चाहिए। 

सम्यक वचन : मनुष्य को हमेशा अच्छा बोलना चाहिए कभी दूसरों को बुरा या उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए। 

सम्यक कर्मीत : मनुष्य को दुराचार और भोग -विलास से दूर रहना चाहिए। 

सम्यक आजिव : हमेशा अच्छे रास्त से कमाए पैसो पर ही अपना जीवन का उदरनिर्वाह करना चाहिए , गलत अनैतिक या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना चाहिए। 


सम्यक व्यायाम : बुरी आदतों को छोड़ देना चाहिए और अच्छी आदतों के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। 


सम्यक स्मृति : हमें कभी यह नहीं  भूलना चाहिए की सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है। 


सम्यक समाधी : ध्यान ही वह अवस्था है जिसमे मन की अस्थिरता,चंचलता शांत होती है।  

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