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10 June 2017

अपनी height को कैसे बढ़ाए ? योगासन & Exercise

अपनी height को कैसे बढ़ाए ? योगासन & Exercise 



How to increase height in Hindi

एक अच्छी height न केवल आपको प्रभावशाली बनाती  है बल्कि आप के personality में चार चाँद लगती  है।  एक अच्छी height हमारा आत्मविश्वास बढ़ाने में मदत करती है।जबकि कम हाइट आपमें हीन भावना पैदा करती है।  और जहा तक करियर का सवाल है ? एक अच्छी हाइट हमारा करियर  बनाने में भी मदत करती   है।  देखा जाए तो हमारे शरीर का विकास 13 से 18 वर्ष की आयु में फ़ास्ट होता है। यदि आप को height बढ़ानी हो तो यही सही समय रहता है। इस समय में थोड़ी मेहनत करे तो शरीर का विकास बहोत जल्द हो जाता है।  एक अच्छी हाइट हमें करियर में भी मदत करती है।  जैसे modeling , में आपका लम्बा होना बहोत जरुरी है।  पुलिस , नेवी etc ऐसे कई करियर है जिसमे आपका लंबा होना बहोत जरुरी होता है।  और बिना हाइट के आप इस क्षेत्र में नहीं जा सकते।

puberty हमारी युवा अवस्था तक हमारी height बढ़ती है। 80% हाइट हमारे जीन्स पर depend करती है। अनुवांशिकता यह  हाइट न बढ़ने का यह एक प्रमुख कारण है।  पर आज हम science और medical की मदत से puberty के बाद भी सर्जरी से हमारी हाइट बढ़ा सकते है।  आज हम इस पोस्ट में ऐसे  ऐसे सारे  तरीके देखेंगे Naturally /Medically (Surgical ) जिससे आप अपनी हाइट बढ़ा सकते हो।


सबसे पहले तो हम हाइट न बढ़ने के प्रमुख कारण देखत है :

1 ) अनुवांशिकता (Heredity ) :
हमारी हाइट हमारा चेहरा , हमारा कलर , यह सब हमारे जीन्स पर निर्भर करते है।  यह जीन्स हमें अपने माता पिता से ही प्राप्त होते है।  यदि माता पिता की हाइट  कम है , तो उनके बच्चो की भी हाइट ज्यादा बढ़ नहीं पाती है।  यह एक शोध में पाया गया है और यह हाइट न बढ़ने का एक प्रमुख कारण भी है।

2) (HGH) Human Groth Harmons  की कमी :
दोस्तों Human Groth Harmons  यह harmons हमारी हाइट बढ़ने में मदत करता है।  HGH हमारे ( पिट्यूटरी ग्लैंड ) पियूष ग्रंथि से निकालता है।  पिट्यूटरी ग्लैंड  हमारे मस्तिष्क में होती है। यदि HGH harmons की कमी हुई तो हमारी Height बढ़ना रुक जाती है। so HGH का हमारी बढ़ने में बहोत बड़ा रोल है।  ( ज्यादा सोने से हमारा HGH harmones level बढ़ जाता है।  )

३ ) कुपोषण :
कुपोषण , पौष्टिक तत्वों की कमी के कारण भी आपकी हाइट बढ़ना रुक जाती है। कुपोषण से आपके पुरे शरीर का विकास रुक जाता है। पौष्टिक तत्व जैसे प्रोटीन , कैल्शियम , vitamins B 12 , phosphorus , और magnesium vitamin D etc न मिलने से भी हमारे शरीर  की growth रुक जाती है। और आज कल junk food जैसे पिज़्ज़ा , नूडल्स , बर्गर , जैसे खाने से हमें सही Nutrition  नहीं मिल पता जिसका सीधा असर हमारे शरीर पर और Height पर होता है।

4 ) कोई लंबे समय की बीमारी :
 अक्सर देखा गया है की बचपन में कोई लंबे समय की बीमारी जैसे पोलियो , अस्थमा , रिकेरस , मीजल्स , etc जैसे रोग के कारण हमारे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण हमारी हाइट बढ़ नहीं पाती।


Height बढ़ाने के कुछ व्यायाम :


लटकाना : लटकाना यह एक बहोत बढ़िया exercise है। जिन्हे  अपने छोटे कद को बढ़ाना है वह एक ऊँची जगह पर एक रॉड लगाकर उसपर सुबह शाम लटक सकते है।  आप अपने क्षमता से 30 सेकंड से लेकर 1 मिनट लटक सकते हो और धीरे धीरे उसका timing बढ़ा सकते हो।  लटकने से आप के सारे शरीर को खिचाव मिलता है।  जिससे आप की हाइट बढ़ने में मदत मिलती है।

रस्सी कूदना (rope skipping )
रोज सुबह 10 मिनट रस्सी कूदना आपके लिए बहोत ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।  एक न केवल आपके पुरे शरीर को व्यायाम देता है  बल्कि आप के पुरे शरीर का blood circulation भी करता है।  रस्सी कूदने से आप के कंधे , हाथ पैर की मसल्स strong होते है और उनका अच्छा विकास होता है।  आप के बॉडी के toxic बाहर आते है और आपकी स्किन हेल्थी बनती है और आप भी हैल्थी और फ़ीट रहते है। यदि आप का ज्यादा मोटे हो तो आप का वजन भी घटता है।

स्वमिंग :
स्वमिंग से आप का  पुरा  शरीर stretch होता है।  जिससे पुरे  शरीर सिर से लेकर पैर तक खिचाव के कारण पुरे शरीर को अच्छा व्यायाम मिलता है। यदि आप रोजाना आधा एक घंटा स्वमिंग करते है तो यह आप के हाइट बढ़ने के लिए बहोत ही कारगर साबित हो सकता है।  Breast Strock यह एक  बढ़िया स्वमिंग की स्टाइल है।  जिससे आप की हाइट बढ़ने में मदत मिलेगी।

running दौड़ना :
10 -15 minute running से आप बहोत सारे फायदे हो सकते है। रोजाना दौड़ने से आप के ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है।  आप को रोग प्रतिकार क्षमता बढाती है साथ ही पुरे शरीर का व्यायाम होता  है।  और आप के पुरे शरीर का विकास होता है।

साइकिलिंग cycling :
रोजाना 15 मिनट साइकिलिंग यह एक बहोत अच्छी exercise है खास कर आप के पैरो के लिए।  साइकिलिंग से आप की बॉडी फ़ीट रहती है आप के पैरो के मसल्स को ताकत मिलती है। और आप के पैरो के मसल्स और हड़िया strong बनती है और उनका पूरा विकास होता है। डेनमार्क में हुए  एक सर्वे के मुताबिक यदि आप रोजाना साइकिलिंग करते है तो यह आप के हार्ट अटैक के chance को 30 % से कम कर देता है।  यह सर्वे लगभग 45 हजार लोगो पे किया गया था।


Height बढ़ाने के योगासन :

ताड़ासन : यह हाइट बढ़ाने के लिए एक उत्तम योग है।  ताड़ासन से हमारी रीढ़ की हड्डी को अच्छा व्यायाम  मिलता है।  यह आसन करने से हमारे पुरे शरीर stretch होता है।  जिससे हमारी हाइट बढ़ने में मदत मिलती है। साथ


  भुजगांसन : भुजांगासन में रीढ़ की हड्डी , पेट , हाथ , छाती , इ. अंगो को व्यायाम मिलता है।  आप की रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है। रीढ़ की हड्डी का विकास होता है।  पैरो की अतिरिक्त चर्बी कम हो जाती है। भुजांगासन यह बहोत ही सरल आसन है तथा इसे कोई भी कर सकता है।

सूर्यनमस्कार : सूर्य नमस्कार करने से 12 आसनो का लाभ मिलता है।  सूर्य नमस्कार आप के पुरे शरीर को लचीला बनाता है।  यह आप के पुरे अंगो को व्यायाम देता है।   सूर्यनमस्कार हड्डिया मजबूत बनती है तथा हड्डियों का विकास होता है।


 हलासन : हलासन में हमारे शरीर का आकार हल जैसे बनता है। इसे करने से हमारी रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है तथा उसका विकास होता है। थाइरोइड ग्लैंड और वजन कम करने में भी यह बहोत सहायक है।


सर्वागासन : सर्वागासन का  नाम ही हमें कहता है की सर्व अंग का आसन इस आसन  के वैसे तो बहोत लाभ है पर थयरॉइड और पिट्यूटरी ग्रंथी का पोषण होता है तथा वह सक्रिय होते है। पिट्यूटरी ग्रंथी ही हमारी हाइट को निर्धारित करती है।  इसलिए सर्वागासन से हमारी हाइट बढ़ाने में मदत मिलती है।  साथ ही हमारी पीठ लचीली बनती है। आप का वजन घटता है। सर्वागासन से रक्त का प्रवाह हमारे सिर के तरफ़ होता है जिससे हमारा तनाव दूर होता है यादाश्त बढ़ती है।  यह हमारे चेहर और बालो के लिए भी अच्छा है।  चहरे के  कील मुहासे दूर होकर चेहरा कांतिमय होता है और आप के बाल भी झड़ना बंद होते है। 

पश्चिमोत्तासन : पश्चिमोत्तासन  करने से हमारे हाथ पैर कंधे और  रीढ़ की हड्डी में खिचाव लाता है जिससे हमारी हाइट बढ़ने  में मदत मिलती है।  हमारी रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और उसको अच्छा व्यायाम मिलता है।  पश्चिमोत्तासन से हमारे पेट की चर्बी कम होती है। पेट के समस्त रोगो से मुक्ति मिलती है। पुरे शरीर में रक्त का प्रवाह होता है एक नयी ऊर्जा शरीर को मिलती है।

त्रिकोणासन : इस आसन में आप के शरीर का आकर त्रिकोण सा बन जाता है। इस आसन से भी आप के पीठ हाथ पैर को खिचाव मिलता है।  जिससे आप की हाइट बढ़ने में मदत मिलती है।  आप की पैरो और पेट की चर्बी कम होती है। आप का शरीर सुडोल और लचीला बनता है।


हस्तपादासन : पादहस्तासन में आप को  के हाथो को सामने झुककर  अपने पैरो को छूना पड़ता है।  इससे आप के पैर हाथ और रीढ़ की हड्डी को बेहरत व्यायाम मिलता है और उनका विकास होता है।  साथ ही आप के शरीर को लचीला बनता है।


height increasing surgery / limb lengthening surgery

आज science और मेडिकल की मदत से आप अपनी natural groth के बाद भी अपनी हाइट को बढ़ा सकते है।  आप इस सर्जरी से उम्र के 20 या 30 वर्ष   के बाद भी अपने हाइट 5 से 7 इंच तक बढ़ा सकते है।  आधुनिक limb lengthening के पहली सर्जरी 1903 में   एक इटालियन सर्जन ने की थी।  तब यह सर्जरी groth plate रूकावट हड्डियों में खराबी को ठीक करने के लिए की जाती थी।  आज बदलते ज़माने के साथ साथ यह एक लंबा होने का रास्ता बन गया है।  दरसल इस सर्जरी में पैरो की हड्डियों को लंबा किया जाता है।  इस पूरी प्रक्रिया में 6 से 1 साल तक लगते है।  यह सर्जरी बहोत लम्बी बेहद दर्दनाक और बहोत costly होती है। यह सर्जरी को लगभग 60 से ७० लाख लग सकते है।  पर  limb lengthening surgery में आप की हाइट जरूर बढाती है। 

29 May 2017

अश्वगंधा के फायदे और सावधानिया

अश्वगंधा के फायदे और सावधानिया 



 ashwagandha benefits in Hindi


दोस्तों अश्वगंधा आयुर्वेदिक की एक बहोत ही प्रसिद्ध और गुणकारी औषधी है और इसके बहोत सारे फायदे है।  आपने अश्वगंधा के बारे में कही सुना होगा।  पर आज मै आप को अश्वगंधा के बारे में detail में बताने जा रहा हु।  अश्वगंधा को  Eglish में winter cherry  कहा जाता है।  अश्वगंधा यह संस्कृत नाम है।  अश्वगंधा का मतलब होता है घोड़े की सुगंध मतलब जब आप इसकी सुगंध लेते है तो वह घोड़े के सुगंध जैसे लगती है। और इसके सेवन के बात हम में जो power , energy , आती है उसकी तुलना घोड़े की power और energy से की है।  इसलिए इसे अश्वगंधा कहा जाता है। वैसे तो अस्वगंधा के पत्ते का भी प्रयोग किया जाता है  पर औषधी में इसके पाउडर का ही उपयोग किया जाता है।  यह पाउडर वास्तव में अश्वगंधा के पौधे की जडे होती है जिसे सुखाकर बाद में इसका चूर्ण बनाकर उपयोग में लाया  जाता है। अश्वगंधा का सेवन हमे फुर्तीला , बलवान , बनता है।  यह बहोत से रोगो में कारगर है।  यहाँ तक U .S. FDA  ( यूनाइटेड स्टेट फ़ूड एंड ड्रग एसोसिएशन ) ने इसे कई सारे रोगो के इलाज के लिए निर्धारित किया है। अश्वगंधा का सेवन male और female दोनों ही कर सकते है।  और इसे आप किसी भी मौसम में ले सकते हो।  यह न तो गरम है और न ही ज्यादा ठंडा। 


अश्वंगधा के फायदे :

1 ) शारीरिक कमजोरी :
अश्वगंधा के सेवन से किसी भी प्रकार की कमजोरी दूर हो जाती है।  आप का वजन तेजी से बढ़ने लगता है।  और आप बलवान , और ऊर्जावान बनाते है।  जो लोग दुबले पतले है उनमे जल्द ही इसका असर दिखाई देगा।अश्वगंधा  रोज दूध और शक्कर के साथ लेने से आप के शरीर में नई शक्ति और ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।  और शारीरिक कमजोरी दूर हो जाती है।

2 ) तनाव (डिप्रेशन ) :
अश्वगंधा का सेवन से मानसिक तनाव डिप्रेशन anzity को कम करता है।  एक स्टडी में यह पाया गया है की अश्वगंधा में antidepressant के गुण है।   हमारा मूड अच्छा होता है वह boost होता है ।  और हम खुश रहते है।  इसके सेवन से दिमाख शांत रहता है।  हमारा concentration और brainpower बढ़ाता है साथ ही साथ उत्साह और एनर्जी बढ़ती है।


3 ) Arthritis गठिया रोग :
arthritis के रोगियों के लिए भी अश्वगंधा बहोत ही फायदेमंद है।  रोजाना दूध के साथ   अश्वगंधा  लेने से आर्थराइटिस से जुडी सभी समस्याएं जैसे जोड़ो में दर्द , सूजन में फायदा होता है।



4 )हाइट बढ़ने के लिए :
रोजाना अश्वगंधा का चूर्ण गाय के दूध और शक्कर के साथ लेने से यह आप की हाइट बढ़ने में मदत करता है।
यह हमारी हड्डियों को मजबूत बनता है और उनका विकास करता है।  पर आप को उम्र यह growing उम्र ही रहना जरूरी है।  साथ ही आप हाइट बढ़ने के exercise योग और अच्छी डाइट भी ले।

5 ) पाचन क्रिया और acidity :
अश्वगंधा को दूध या गरम पानी के साथ लेने से कब्ज की परेशानी दूर हो जाती है।  पाचन प्रकिया अच्छी बनती है और gas अपच और acidity से राहत मिलती है।

6 ) sex booster :
रोजाना दूध के साथ अश्वगंधा लेने से यह आप के सेक्स पावर को बढ़ाता है।  अक्सर कई लोग सेक्स के दौरान थकान की समस्या होती है।  इसके सेवन से सभी प्रकार की सेक्स कमजोरी दूर होती है।  साथ ही इसके सेवन से  शिघ्र पतन, स्वप्न दोष , नपुंसकता और यौन दुर्बलता का नाश होता है और आप एक हेल्थी सेक्स लाइफ का अनुभव करते है।

7 ) low sperm count :
अश्वगंधा के रोजाना सेवन से पुरुषो में low sperm count की problem दूर होती है।  साथ ही sperm की गुणवत्ता और मात्रा भी बढ़ने लगती है।

8 ) Antibacterial property : Center of biotechnology University of Alahabad में एक research हुआ था जिसके मुताबिक अश्वगंधा में antibacterial property भी होती है।  इसका मतलब हमें कुछ खाने से internal infection होता है।  कोई organ  में infection होता है।  उन्हें अश्वगंधा का सेवन ख़त्म कर देता है। यह आप के organ को active रखता है।

9) Thyroid problem : अश्वगंधा thyroid gland को stimulate करता है।  जिन्हे थाइरोइड की समस्या है उनके लिए अश्वगंधा एक बेहतर उपाय है।  यदि आप अश्वगंधा का रोजाना सेवन करते है।  तो अश्वगंधा थाइरोइड ग्लैंड का secretion कम करता है और आप के थाइरोइड की समस्या को दूर  करता है।

10 )  आलस्य दूर होता है : अश्वगंधा के सेवन से आलस्य , निराशा दूर होती है और आप में एक नया जोश , उत्साह आने लगता है।

11 ) बूढ़ा नहीं होते : अश्वगंधा में anti aging के गुण पाए गए है।  यह आप की उम्र को निंयत्रित करती है। आप जल्द बूढ़े नहीं होते आप की स्किन जवान रहती है।  National Institute of Advance Science and Technology ने यह proof किया है की अश्वगंधा के नियमित सेवन से स्किन पर पड़ी झुर्रियों और दागो  से बचा जा सकता है।

12 )Neuron Disease : अश्वगंधा से  neuron disease में भी बहोत फायदा मिलता है। यदि आप की कोई नर्व ख़राब या damage हो गयी हो तो अश्वगंधा से आपको जरूर फायदा होगा। 

13 ) श्वेतप्रदर  :  महिलाओ  में श्वेतप्रदर और रक्त प्रदर में अश्वगंधा बेहद लाभकारी है।  अश्वगंधा से हमें आयरन भी मिलता है।  अक्सर  श्वेतप्रदरमें महिलाओ के योनि से चिपचिपा सफ़ेद रंग का पानी निकलता रहता है।  जिससे महिलाओ में कमजोर , चिड़चिड़ापन ,हाथ पैर दर्द , इत्यादि समस्या होती है। 

14 ) गर्भपात : महिलाओ  बार बार  गर्भपात (miscarriage ) में भी अश्वगंधा का सेवन लाभकारी है।

15 ) दर्द निवारक : अश्वगंधा के पत्ते भी कई रोगो के काम में आते है।  फोड़ा, फुंसी और  दर्दनाशक के रूप में भी काम आते है। वात या गठियावात में पैरो के joint में बहोत दर्द रहता है।  joint पर अश्वगंधा के पत्तो को गरम करके लगाने से फायदा होता है।

16 ) रोगप्रतिकार क्षमता : अश्वंगधा के रोजाना सेवन से हमारी रोगप्रतिकार क्षमता बढ़ती है। इससे हमें रोगो से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है और कोई भी वायरस का हम पर जल्द असर नहीं हो पाता।

17 )बॉडी बिल्डिंग और मसल्स बनाने में : हम मसल्स और बॉडी बिल्डिंग में कितने महगे महगे supplement प्रोटीन के डिब्बे लाते।  अश्वगंधा यह सबसे सस्ता product है जो आप की मसल्स बनाने में मदत करता है।  यह एक natural testosterone booster है।  यह हमारे testosterone को बूस्ट करता है और मसल्स बिल्डिंग में आप की सहायता करता है। 



मार्किट में कौन कोनसे अश्वगंधा के प्रोडक्ट उपलब्ध है। 

दोस्त मार्किट में आप को अश्वगंधा पाउडर , कैप्सूल या फिर liquid में भी मिल जायेगा।  आप को मार्किट में ढेर सारे अश्वगंधा के प्रोडक्ट मिल जायेगे। मै आप को  भारत के कुछ top brand के अश्वंगधा suggest कर रहा हु।  पर आप किसी अच्छे डॉक्टर या चिकित्सक की राय से ही अश्वगंधा ले। 

1 ) पतंजलि  अश्वगंधा चूर्ण। 
२) पतंजलि अश्वगंधा कैप्सूल 
३) पतंजलि अश्व्गन्धारीठ सायरप 
४) हिमालया अश्वगंधा कैप्सूल 
५) Organic india अश्वगंधा कैप्सूल 
६) Medisys अश्वगंधा कैप्सूल 
७) डाबर अश्वगंधा कैप्सूल & सायरप 
८) Herbal hill अश्वगंधा कैप्सूल & पाउडर 
९) Nutrigold अश्वगंधा कैप्सूल 
१०) Ayush Herbs अश्वगंधा कैप्सूल 

अश्वगंधा के नुकसान और सावधानियाँ : 

दोस्तों  किसी भी चीज के दो पहलु होते है।  अच्छा या बुरा , यदि हम उसका उपयोग  सही समय , सही मात्रा में करते है तो उससे हमें फायदे जरूर मिलते है।  यदि हम उपयोग में कुछ गलती करते है तो हमारे body को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। हम अश्वगंधा के सेवन में कुछ सावधानियाँ दखते है। 

1 ) अश्वगंधा के सेवन से नींद बहोत आती रहती है।  जो लोग लगातार अश्वगंधा का सेवन करते है बादमे उन्हें यह प्रॉब्लम नहीं आती है।  पर आपने अभी अभी अश्वगंधा खाना शुरू किया है तो हो सकता है की आप को बहोत नींद आए।  ऐसे में आप इसका प्रयोग शाम को भी कर सकते है। 

2 ) अश्वगंधा से वजन बहोत जल्द बढ़ जाता है।  यदि आप पहले से ही मोटे है तो अश्वगंधा का सेवन आपको और मोटा बना देगा।  so  मोटे लोगो के लिए अश्वगंधा उनकी तकलीफ और बढ़ा देगा। 

3 ) शुरवात में अश्वगंधा के सेवन से शरीर का तापमान बढ़ सकता है।  आप को बुखार या जी मचलाना ऐसा हो सकता है।  ऐसा नजर आने पर तुरंत अश्वगंधा का सेवन बंद कर दे और डॉक्टर की राय ले। 

4 ) गर्भवती तथा स्तनपान वाली महिलाएं  अश्वगंधा का सेवन न करे।  यदि वे अश्वगंधा का सेवन करते है तो उनके होनेवाले बच्चे पर उसका बुरा असर पद सकता है।  इसलिए गर्भवती महिलाएं इसके सेवन से बचे। 

5 ) यदि आप की  कोई दूसरी medicine है तो अश्वगंधा का प्रयोग न करे।  या डॉक्टर की राय से ही अश्वगंधा ले। 

6 ) अश्वगंधा 3 से 5 ग्राम ही एक दिन में सेवन करे।  इससे ज्यादा मात्रा आपको हानी पंहुचा सकती है।  आप सुबह या शामको खाली पेट गुनगुने दूध के साथ इसका सेवन कर सकते है। 

मधुमेह रोगी , पाचन संबधी रोगी, अल्सर पीड़ित , ब्लड प्रेशर के मरीज अश्वगंधा का सेवन करने से पहले किसी चिकित्सक की राय जरूर ले।  या एक नार्मल व्यक्ति भी अश्वगंधा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की राय ले।  अश्वगंधा बेहद ही फ़ायदेमंद है पर हो सकता है की आप को इससे कुछ नुकसान भी हो इसलिए आप डॉक्टर की राय अवश्य ले। 



2 April 2017

करेला के अद्भुत फायदे

करेला के अद्भुत  फायदे


karela ke fayde in Hindi


कड़वे स्वादवाले हरे रंग का करेला एक बेल है। पर करेला के फायदे अनेक है , जिसके फलो की कई तरह की सब्जिया बनाती है।  कड़वे स्वाद के चलते इस मशहूर भारतीय शाक को ज्यादातर लोग नापसंद करते है।  लेकिंन , अपने पौष्टिक और औषधियों गुणों के कारण यह दवा के रूप में भी काफी लोकप्रिय है।  इसके फल का तरकारी के रूप में , पत्रशाक अथवा पत्रस्वरस का चिकित्सा में इस्तेमाल होता है।

करेले का नाम सुनते ही कड़वेपन का ख्याल आ जाता है।  हालांकि करेला अपने गुणों  लिए कम और अपने कड़वे स्वाद के के कारण ज्यादा मशहूर हो रहा है। दरअसल , जब से इंसान डायबिटीज और हाई ब्लूडप्रेशर जैसी lifestyle वाली बीमारियों के चंगुल में फसा है , तबसे करेले को उसके कड़वे स्वाद के बावजूद प्रसिद्धि मिल गई है।  करेले के विशिष्ट गुणों की बदोलत उसके औषधियों उपयोग के अलावा सब्जी के  भी इसका अच्छा खासा उपयोग होता है। करेले के सब्जी बनाने की १५ -१६ विधिया प्रचलित है।

मूल अफ्रीका और चीन
करेले का वानस्पतिक नाम ' momordica  charantia ' है।  इसका जन्म अफ्रीका और चीन माने जाते है। यही से कार्ल दुनिया के दूसरे हिस्सो में पंहुचा।  भारत में किस जंगली प्रजातियां आज भी देखी जाती है।  करेला विभिन्न आकार -प्रकार में पाया जाता है।  इसकी चायनीज वेरायटी 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी होती है।  वहाँ पैदा होनेवाला करेला हरे के उप्पर हल्का पिला रंग लिए होता है। जो किनारो की और मुड़ा हुआ नुकीला और खुरदुरा होता है।   इसका रंग हरे के साथ सफ़ेद भी देखा गया है।  वहां इसकी कई किस्मे है और फलो की आकृति के अनुसार कड़वाहट में भी काफी अंतर है।

लता जाती का पौधा
आमतौर पर मार्च के अंत और अप्रैल के शुरू में उत्तर भारत के सब्जी मंडियों में दिखवाला कराल लाता जाती का स्वयंजात और कृषिजन्य वनस्पति है।  इसे करवेल्लक , करवेल्लिका , कारेल , करेली , और कांरेल जैसे नामो से भी जाना जाता है।


करेले की न्यूट्रिशन वैल्यू :

करेला बेशक खाने में कड़वा हो , लेकिन इसके गन बेहद मीठे है।  इसका इस्तेमाल रुचिकर ई पथ्य शाक के रूप में बहुत होता है।  चिकित्सा में लाता या पत्र का सरस्व का उपयोग दीपन , भेदन , कफ -पित्त -नाश , ज्वर , कृमि , वातरक्त और आमवात में हितकर मन जाता है।  करेले में प्रचुर मात्रा में विटामिन A , B और C पाए जाते है। विटामिन A इसमें दूसरे विटामिन से ज्यादा मात्रा में पाया जाता है।  इसमें फॉस्फोरस तथा कम मात्रा में विटामिन c पाया जाता है।  इसके अलावा कैरोटीन , बीटाकेरोटन ,लुटिन , आयरन , ज़िंक,  ,पोटैशियम ,मैग्नीशियम और मैगनीज़ जैसे फ्लेवोनॉइड भी पाए जाते है।  करेला का सेवन कई रूपो में किया  जा सकता है।  इसका जूस बनाकर पी सकते है सकते , अचार बना  है या फिर इसका इस्तेमाल सब्जी के रूप में किया जा सकता है।


करेला के गुण :

करेला एक ऐसी सब्जी है जो काफी सारी बीमारियों को दूर रखने में कारगर साबित होती है।  मनुष्य के लिए करेला परम हितकारी और औषधियों गुणों का भंडार है।  भूक को बढाकर करेला हमारी पाचनशक्ति को सुधारता है।  पचने में करेला हल्का होता है।  गर्मी से उत्पन्न विकारो पर शीतल होने के कारण यह शीघ्र लाभ करता है। मजेदार बात यह है की जो लोग करेले की सब्जी नहीं कहते है , वे भी करले के औषधियों गुणों के चलते  कद्रदान।   जगहों पर करले में के कई तरह के स्वाद विकसित कर लिए गए है।  करेले की कड़वाहट को दूर  करने के लिए उसे चीरकर उसमे नमक भरकर कुछ घंटो तक रखने  का चलन है।  बाद में धो कर इसकी सब्जी बनाई जाती है।ऐसा करने से कड़वाहट दूर हो जाती है। 

शरीर में लगातार विभिन्न प्रकार की बीमारियों के वाहक वायरस और बैक्टरिया के हमले को झेलता  है।  ये हमले तभी नाकाम हो सकते है , जब शरीर अंदर से मजबूत हो।  करले  में मौजूद पौष्टिक तत्व , खनिज और विटामिन्स शरीर की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है , जिससे इंसान कैंसर जैसे नाइलाज बीमारी का भी मुकाबला कर सकता है। 

डायबिटीज में लाभदायक :
डायबिटीज  मे करेला असरदायक दावा का काम करता है।   करेले के टुकड़ो को छाया में सुखाकर उसका पावडर सुबह खली पेट लेने से लाभ होता है। 


त्वचा रोग में लाभकारी :


करेले में मौजूद बिटर्स एल्केलाइड तत्व खून को साफ करते है।  रोजाना  सुबह शाम आधा चम्मस रस बराबर मात्रा में शहद के साथ लेने से या करेले के बने लेप को रत को सोते समय लगाने से फोड़े फुंसी और त्वचा रोग नहीं होते है।  दाद , खाज , खुजली , सियोरोसिस  जैसे त्वचा रोगों में करले के रस में निम्बू का रस मिलाकर पिने से फायदा होता है।  अगर त्वच रोग है।, तो करेले का रास कुछ दिनों तक पीना लाभ दायक होता है। 

पाचनशक्ति बढ़ाए : करेला शरीर में वायु को बढाकर पाचन क्रिया को तेज करता है।  पाचनशक्ति बढ़ने से भूक बढाती है। करेला ठंडा है , इसलिए गर्मी से पैदा होनेवाली बिरामरियो के लिए फायदेमंद है।  किसी भी प्रकार से करेले का नित्य सेवन करने से पाचनशक्ति मजबूत होती है। करेला खुद भी जल्दी पचता है।  



जोड़ो के दर्द में राहत : 

करेला जोड़ो के दर्द में रामबाण इलाज माना जाता है।  गठिया या जोड़ो के दर्द में करले की सब्जी खाने से दर्द वाली जगह करेले के पत्तो के रस से मालिश करने से आराम मिलता है।  करेले तथा तील के तेल को बराबर मात्रा में लेकर प्रयोग करने से वात रोगी को आराम  मिलता है।  इस तेल की मालिश करने से गठिया तथा वात के रोगों से लाभ पहुचता है। 


उल्टी दस्त में फायदेमंद :

करले के तीन बीज और तीन कालीमिर्च को घिसकर पानी मिलाकर पिलाने से उलटी दस्त बंद हो जाते है।  अम्लपित्त के रोगी , जिन्हें भोजन करने से पहले उल्टियां होने की शिकायत रहती ह, उन्हें करेले के पत्तो को सेककर उसमे सेंधा नामक मिलाकर खाने से फायदा पहुचता है।  करेले के रास में थोड़ा पानी और कला नमक मिलाकर सेवन करने से भी तुरंत लाभ मिलता है। 


मोटापा से रहत दिलाए :

करेला मोटापा कम करने में अहम् किरदार निभाता है।  करेले के रास में एक निम्बू का रास मिलाकर सुबह पिने से शरीर में बनानेवाले विषैले पदार्थ और फैट्स कम होते है।  इससे मोटापा काम होता है।  करेले के रास को निम्बू के रस के साथ पानी में मिलाकर पीने से वजन कम किया जा सकता है। 


पथरी को गला देता है :

दो करेले का रस पीने से और करेले  की सब्जी खाने से पथरी गलाकर बाहर निकल जाती है।  करले के रस में शहद मिलकर पिने से पथरी गलकर पेशाब के रस्ते निकल जाती है।  इसके पत्तो के रास में थोड़ी सी हींग मिलाकर पिने से पेशाब खुलकर आती है। 


बवासीर  करे जड़ से खत्म :

खुनी बवासीर में एक बड़ा चम्मस करेले के रस में शक्कर मिलाकर सुबह शाम कुछ दिन तक पिने से खुनी बवासीर में आराम मिलता है। 


मुह के छाले करे दूर :

मुह के छाले होने पर करेले के रास से कुर्ला करने से फायदा होता है।  मुह में चले होने पर करले के रास को गर्म करके , में पिसी हुई फिटकरी डालकर कुर्ला करने से छाले खत्म हो जाते है।  इसके आलावा करेला हैजे में रहत देता है।  सिरदर्द ठीक करता है।  रतोंधी होने पर करेला का सेवा करना फायदेमंद होता है।  कब्ज , कफ , मुहासे , दिल के बीमारी , पेट के कीड़े साफ करने में भी करेला सहायक होता है। 


11 February 2017

खर्राटे के कारण और उपचार




 Treatment for snoring in Hindi


अगर आपका पार्टनर खर्राटे लेता है तो समझिए आप की रातो की नींद तो उड़ ही जाएगी।  कई लोग खर्राटों को छोटी सी समस्या समझ कर उस पर ध्यान नहीं देते।  जबकि यह एक गंभीर समस्या है।  खर्राटे लेना आदत नहीं बल्कि एक बीमारी है जिसका इलाज जरुरी है।  नहीं तो यह आप के पार्टनर को परेशान कर देगा।  और हृदय और मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।


क्यों आते है खर्राटे ?


नींद में जब साँस लेने में रूकावट पैदा होती है तब खर्राटे आते है।
नाक से साँस लेना पडत है और तेज आवाज निकलती है।
गले का पिछला हिस्सा संकरा हो जाने की वजह से साँस लेने व छोड़ने में दिक्कत होती है।
ऑक्सीजन संकरी जगह से होकर गुजरता है, जिससे उसके आस पास के टिशूज vibrate होने लगते है।  vibration के साथ आनेवाली इस आवाज को खर्राटे कहते है।


खर्राटों का कारण :


खर्राटों के कई कारण हो सकते है।  इन कारणों को यदि जान ले तो इलाज करना आसान हो जायेगा।

पीठ के बल सोने से जीभ और तालु गले के पीछे की और चली जाती है , जिससे साँस लेने और छोड़ने में रुकावट पैदा हो जाती है।

नाक या मुह में सूजन की वजह से भी खर्राटे आते है।  किसी प्रकार की एलर्जी , इन्फेक्शन , धूम्रपान , अल्कोहल अदि सूजन की वजह हो सकती है।

वजन ज्यादा होने की वजह से  या मोटापे की वजह से गले के आसपास फैट जमा हो जाता है ,जिससे सोते समय साँस की नाली डाब कर संकरी हो जाती है।

खाने में ज्यादा नमक की वजहसे भी खर्राटे आ सकते है।

जीभ का मोटा होना , नाक की हड्डी का टेढ़ा होना या बढ़ जाना या नक् के अंदर के मास के बढ़ने से भी खर्राटों की समस्या हो सकती है।

गर्दन छोटी होने पर या फिर साँस की नाली संकरी होने पर भी खर्राटे आ  सकते है।

बच्चो को भो खर्राटे आते है , जिसकी वजह टॉन्सिल , जुकाम , जीभ का मोटा होना या नाक की हड्डी का टेढ़ा होना हो सकता है।

                                                                                 जरूर पढ़े : ह्रदय के लिए 8 सुपर फ़ूड

खर्राटो से बचने के उपाय :


जो खर्राटे जीभ के मोटा होने , नाक की हड्डी टेढ़ी होने , नाक के अंदर मांस बढ़ जाने या फिर टॉन्सिल की वजहसे आते है।  उनके लिए सर्जरी ही एक मात्र इलाज है , लेकिन अगर समस्या बड़ी नहीं , फिर भी आप खर्राटे भरते हैं तो जीनशैली में बदलाव करके काफी हद तक खर्राटों से छुटकारा पा सकते है।

वजन अधिक  है तो उसे काम करे।

वर्कआउट और योग से भो  यह परेशानी हल हो सकती है।  गले की मासपेशियो के लिए exercise करे।
smoking ,धूम्रपान न करे।  धूम्रपान की वजह से फेफड़ो तक ऑक्सीजन कम पहुचता है।  ऑक्सीजन ज्यादा लेने के लिए नाक व मुह को और मेहनत करनी पड़ती है , जिससे खर्राटे आते है।

अल्कोहल और नींद की गोलिया न ले।  ये पदार्थ गले की मासपेशिया को रिलैक्स कर देते है।  जिससे साँस की नाली संकीर्ण हो जाती है।   साँस लेने में रुकावट पैदा होती है।

करवट लेकर सोए।  पीठ के बल सोने से साँस लेने में दिक्कत हो सकती है।

सोने का एक वक़्त बनाए।  कोशिश करे की रोजाना आप उसी टाइम पर सो जाए सोते वक़्त शरीर को आराम दे।

बेड पर समतल सोने के बजाए सर को थोड़ा ऊँचा करके सोए।

रात को हल्का भोजन करे।

नाक बंद होने से या सर्दी जुकाम होने से भी खर्राटे आते है।  डॉक्टर को देखा के सर्दी जुकाम की दवाई ले।



एंटी स्नोरिंग डिवाइस :


मार्किट में आप को कई एंटी स्नोरिंग डिवाइस की मदत से खर्राटों को कम कर सकते है। इसे नक् के ऊपर चिपकाया जाता है। यह नथुनों को थोड़ा सा ऊपर उठाकर खोल देता है।  जिससे व्यक्ति मुह की जगह नाक से आराम से साँस ले पता है।

नेसल स्ट्रिप या डायलेटर्स : यह खर्राटों में लाभकारी हो सकता है।  इसे नाक के उप्पर चिपकाया जाता है।  यह नथुनों को थोड़ा सा ऊपर उठा कर खोल देता है।  जिससे व्यक्ति मुह की जगह नाक से आराम से साँस ले पता है।

सीपीएपी : contentious positive airway pressure  machine : एक तरह का मास्क होता है।  जो नाक व मुह को कवर कर लेता है। जिससे व्यक्ति सोते समय आराम से साँस ले पाता है।

एमएड़ी : mandibular advance device को सोते समय मुह में लगाया जाता है।  जिससे खर्राटों की आवाज नहीं आती।  जीभ में vibration की वजहसे होनेवाले खर्राटों में यह device कारगर होता है।   यह जबड़े और जीभ को आगे की और रखता है , ताकि गले के पिछले हिस्से में जगह बन जाए और जीभ को vibrate करने वाली साँस संकीर्ण होने से रोकता है।


खर्राटों को रोकने के लिए कुछ mobile  apps :

  1. anti snoring 
  2. anti snor sleep laboratory
  3. anti snor light
  4. snoring defective pro  

क्यों खतरनाक है खर्राटे आना :

जो लोग खर्राटो को महज थकान से जोड़कर या छोटी समस्या समझकर उसे ignore करते है , उन्हें सतर्क होने की जरुरत है।  खर्राटों का आना कई रोगों की और इशारा करता है।

नींद पूरी नहीं होती है।  पुरे दिन व्यक्ति थका थका  सा महसूस करता है।  इसके आलावा नींद में कमी होने की वजह से हार्मोन्स संतुलन बिघडता है।


अगर खर्राटों का इलाज न किया जाए तो यह स्लीप एप्निया का कारण बन सकता है।

खर्राटों की वजहसे दिल का दौर पड़ने का खतरा भी रहता है।  क्यों की खर्राटों की वजहसे blood circulation बाधीत होता है। साथ ही oxygen की कमी होने की वजहसे दिल को ऑक्सीजन के लिए ज्यादा pressure लगाना पड़ता है।

खर्राटों की वजहसे शरीर में oxygen का स्तर घट जाने से blood pressure भी बढ़ सकता है।

स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।

खर्राटों की वजहसे कई बार व्यक्ति साँस लेने के लिए मुह खोलकर सोता है , जिससे हवा बिना छीने सीधे फेफड़ो तक पहुच जाती है , जिससे फेफड़ो में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।



योग द्वार खर्राटों से मुक्ति :


ओम का उच्चारण करे।  सुखासन या पद्मासन में बैठ जाए। दोनों हाथो को ज्ञान मुद्रा में रखे।  गहरी साँस भरे और ओम का उच्चारण करे।

सिंहासन  करने से भी खर्राटों से रहत मिलेगी।  दोनों पैरो को मोड़कर बैठ जाए।  अपने कुल्हो को पैरो पर रखकर आगे की तरफ झुके ,अपने दोनों हाथो को घुटनो पर रखे। साँस को आराम से अंदर ले और साँस को बहार छोड़ते समय अपनी जीभ को बाहर निकालकर मुह से सिंह की तरह घुर्राने की आवाज निकले। इससे गले की मासपेशियो का व्यायाम होता है।

नियमित प्रणायाम करे।  पद्मासन या सुखासन में बैठ जाए और आंखे बंद करके गहरी साँस ले और छोड़े।  इससे फेफड़ो व साँस नाली तक की कसरत होती है। 

भ्रामरी आसन भी खर्राटे से आराम दिलाने में मदत करता है।  भ्रामरी आसन के लिए सुखासन में बैठ जाए।  दोनों हाथो के अंगूठे से दोनों कानो को बंद करके अनामिका उंगली को माथे पर और मध्यमा , तर्जनी को आखो पर रखे।  अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखे लंबी और गहरी साँस फेफड़ो में भर ले और कुछ देर के लिए साँस रोके इसके बाद भवरे जैसी आवाज करते हुए साँस को बाहर छोड़े , फिर कुछ देर के लिए साँस को बाहर ही रोके। 

गले की मासपेशिया को मजबूत बनाने के लिए हो सके तो कोई गाना play करके गाने के साथ आप भी जोर जोर से गए।  इससे गले की मासपेशियो का आराम होता है।  बासुरी और माउथॉरगन जैसे यंत्र बजाना भी गले के लिए अच्छा रहता है। 

नोट : डॉक्टर की सलाह जरूर ले।


19 January 2017

शिलाजीत के चमत्कारी फायदे

 शिलाजीत के चमत्कारी फायदे



Benefit of shilajit in hindi


शिलाजीत एक बहोत ही अमूल्य औषधी है और उसके Benefit फायदे बहोत ही सारे है।  यह बहोत लाभदायक है इसके उपयोग से आप फिर से जवान हो सकते हो।  यह आप को बलधारी , ओजवर्धक और आप के दुर्बलत  का नाश कर के उत्साहवर्धक बना देती है। दरअसल यह एक काले भूरे पत्थर के सामान दिखता है।  यह हिमालय के पहाड़ो से निकलने वाला पदार्थ है और स्वाद में कड़वा  होता है।   यह नेपाल और पाकिस्तान में भी पाया जाता है। यह बढाती उम्र को कम करने के लिए अती प्रभावी है

शिलाजीत कई प्रकार के बीमारी को दूर करता है।  यह physical और mental दोनों के लिए असरदार है।  जैसे उम्र का बढ़ना , मधुमेह , पथरी , स्वप्नदोष , नपुंसकता , Infertility , अस्थमा , sex power बढ़ाना , piles , दिमाकी कमजोरी , गठिया रोग ,पीलिया कब्ज etc तो चलिए हम शिलाजीत के फायदे देखते है। 

शिलाजीत के फायदे :


1 ) दिमाकी शक्ति बढ़ाए : शिलाजीत के सेवन से दिमाकी थकन तनाव मिटता है।  और हमारी nervous system को अच्छा बनाता है।  जिसके साथ ही हमारी यादाश्त शक्ति बढाती है।

2 ) डायबिटीस में फायदेमंद : शिलाजीत यह 4 मिनरल का प्रोडक्ट है - gold silver, iron और copper  और करीब 85 micro मिनरल्स भी इसमें मौजूद है।  यह मिनरल्स हमारे body का पोषण करते है  और हमारे शुगर लेवल को कम करते है।

3 ) सेक्स पॉवर बढ़ाने के लिए : सेक्स पावर बढ़ने के लिए आयुर्वेदिक में शिलाजीत को सबसे असरदार बताया गया है।  शिलाजीत के सेवन से आप जवान बनने लगते है।  शरीर स्वस्थ पुष्ट और शक्तिशाली बनाता है।  या आप के सेक्स टाइम को बढ़ता है और साथ ही premataure ejaculation , infertility , low spermcount , नपुंसकता ,स्वप्नदोष ई. सभी दोषो को दूर करने में कारगर है।  यह सभी प्रजनन अंगो को ताकत देता है और जिसका असर आप के अच्छे sexlife पर होता है।


4 ) अल्सर में फायदेमंद : शिलाजीत पेट के अल्सर में बहोत फायदेमंद है।  इसमें हमारे शरीर के गैस्ट्रिक एसिड के सिक्रेशन को कम करने की क्षमता है।  जो हमारे शरीर  में अल्सर बनने से रोक देता है।

5 ) दिल को healthy बनाता है : शिलाजीत के सेवन से हमारा blood pressure नियंत्रित रहता है।  यह रक्त शुद्ध करता है।  और नसों में blood circulation बढ़ता है। यह heigh blood प्रेशर को  maintain रखता है।
  

6 ) तनाव को दूर करने में फायदेमंद : तनाव और depression के शिकार रोगियों इ शिलाजीत का सेवन जरूर करना चाहिए यह तनाव पैदा करने वाले हार्मोन्स को balance करता है। और आप के दिमाख को शांत और Healthy बनाता है।

7) liver और पथरी में फायदेमंद : पथरी रोगियों के लिए पेशाब करते वक़्त जलन तथा बहोत दर्द होता है।  यदि वे शिलाजीत का सेवन कर तो उन्हें भी लाभ मिलता है। 

8 ) Strong anti -decedent : शिलाजीत का सेवन आप की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है।  इसमें मौजूद मिनरल्स आपके शरीर को पुष्ट बनाता है। जिससे आप में   ऊर्जा  का संचार होता है। यह enzymic और nonenzymic गतिविधि एक अच्छा नियंत्रक है।

  
9 )    महिलाओ में अनियमित पीरियड :  बहोत बार महिलाओ में पीरियड में अनियमितता रहती है। शिलाजीत के सेवन से महिलाओं में पीरियड के समस्या दूर होती है। 

10) Cholestrol लेवल कम करे : यह कोलेस्ट्रॉल triglyceride LDL और VLDL के स्तर को कम करता है। 

11 ) दमा और साँस लेने में तकलीफ : शिलाजीत साँस के मासपेशियो को शक्ति प्रदान करता है और कमजोरी दूर करता है। दमा के रोगियों में भी यह असरदार है।  यह अस्थमा के अटैक को कम कर देता है। 


सावधानियां : 
  •  आज कल मार्केट में बहोत सारे शिलाजीत कैप्सूल और पाउडर मौजूद है , कृपया अच्छे क्वालिटी का और डॉक्टर के सलाह से ही शिलाजीत का सेवन कर अन्यथा आप को नकली शिलाजीत से लाभ नहीं होगा। 
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  • यह बेहद लाभकारी है पर कभी कभी इसका दुष्परिणाम भी हो सकता है।  इसलिए इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना न करे। 

  • शिलाजीत के सेवन करते समय अल्कोहल, सिगरेट,मासाहार और मसालेदार पदार्थ का सेवन न करे। 

  • शिलाजीत का सेवन सुबह खाली पेट ही करे और सेवन के 3- 4 घंटे बाद ही भोजन करे। 

  • कभी कभी शिलाजीत के सेवन से उल्टियां पेटदर्द एलर्जी हो सकती है ,इसे वक़्त डॉक्टर से मिले और सलाह ले। 
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